JUST REMEMBER RAMAYAN IS HISTORY OF HUMANS

I need your view on this: “My RAM was neither a criminal nor a hypocrite who would bless the abduction of Sita by requesting Agni Dev for safe keeping, and then ask for Agni Pariksha. As if this was not enough, he would then disown Sita to APPEASE his public and satisfy his hunger for power. No he did no such things.”

The correct interpretation: Shri Ram and Mata Sita established AGNI PARIKSHA AS AN ADHARM.

The correct interpretation of facts in Ramayan is arrived at by accepting that Ramayan, being History of HUMANS, NO SUPERNATURAL or MIRACULOUS powers was available to any of the characters.


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Thursday, October 27, 2011

आवश्यकता है हिंदुओं की मानसिकता बदलने की, ताकी वो बदलाव और सुधार ला सकें

WE NEED TO CHANGE THE ATTITUDE OF HINDUS TO FIGHT CORRUPTION, OTHER SERIOUS PROBLEMS.
हिन्दुस्तान मैं जो भी समस्याएँ हैं वो इस लीये हैं क्यूंकि हिंदू पूरी तरह से कर्महीन जीवन बिता रहा है; इस मानसिकता को बदलना होगा | यह मानसिकता १००० वर्ष की गुलामी की देंन है | आजादी के बाद इसे बदलने का कोइ प्रयास नहीं करा गया |

निम्लिखित कुछ PHYSICAL VERIFIABLE PARAMETERS हैं जो कि धर्म की सफलता/असफलता समाज मैं दर्शाते है:

1. Female foeticide,
2. Lack of education for girls,
3. Dowry deaths,
4. Suicides among farmers,
5. Increase in court cases among relatives,
6. Corruption, mistrust and discontent,

अफ़सोस की बात यह है कि इन ६४ वर्ष मैं हिंदुओं का व्वय धर्म और तथाकथित धर्म के कार्यों मैं जबरदस्त बढा है,

लकिन;

उसका कोइ भी लाभ हिंदू समाज मैं रहने वालों को नहीं मिल पा रहा है | सरकारी आकडे बताते हैं कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वालो कि संख्या, आजादी के बाद बढ़ी है |

हरेक धर्म/RELIGION के ३ प्रमुख भाग होते हैं:
{निचे दिए होए पहले दो भावनात्मक(EMOTIONAL) तरीकें हैं धर्म से जुरने के; तथा तीसरा भौतिक (PHYSICAL) }

१. पूजा या भक्ती;
२. विधी, जैसे कि अगरबत्ती जलाना, फूल अर्पण करना, हवनं ...;
३. धर्म, या आपकी धर्मानुसार जिम्मेदारियां या कर्म जिसे की PHYSICALLY करना है
eg:

• हरे पेड को काटना पाप है,
• यह हमारा प्रमुख धर्म है, कि हमारे परिवार मैं तथा जिस समाज मैं हम रह रहे हैं, उसकी उनत्ती के लीये प्रयास करें; इसी लीये जिस शेत्र मैं जो रह रहा है वहाँ के मंदिर मैं नियमित तोर से जाना अनिवार्य माना गया है |
• शादी पर जब हमसब दावत का आनंद लेते हैं तो वह एक संकल्प है कि नवदंपती की समाज हर संभव मदद करेगा; यही सोच नवजात शिशु के पैदा होने पर भी है |
तथा और बहुत कुछ ,

ऊपर दिए गए पहले २ भावनात्मक (EMOTIONAL) तरीके हैं धर्म से जुड़ने के, तो तीसरा भौतिक(PHYSICAL) .|

इस भौतिक(PHYSICAL) धर्म के भाग को संतों ने गुलामी के समय सोच समझ कर घटाया था, क्यूँकी उस समय जिस माहोल मैं हिंदू, किसी तरह से जी रहा था, उसके लीये भौतिक(PHYSICAL) धर्म निभाना संभव नहीं था |

उस समय कर्मवीर श्री कृष्ण को एक बालगोपाल के रूप मैं सूरदास जी ने प्रस्तुत करा, जो कि गोपियों के साथ रास रचाते हैं | तुलसीदास जी ने हिंदी मैं रामचरितमानस की रचना करी और कर्म से हट कर भक्ती को प्रमुखता दी | माहाऋषि वाल्मिकी द्वारा दिये गयी इतिहासिक तत्वों पर भी तुलसीदास जी ने समझौता करा |

अनेक उद्धरण दिए जा सकते हैं कि किस तरह से धर्म से कर्म घटा कर भावनात्मक भाग बढ़ा दिया गया था | अफ़सोस इस बात का है कि आजादी के बाद उसे ठीक नहीं करा गया, बलिक भावनात्मक भाग और बढ़ा दिया गया है |

ध्यान रहे कि कर्म का भाग कम करके और भावना का भाग बढाने का गुलामी के समय संतो का उद्धेश यह था कि किसी तरह से उस घोर मुसीबत के समय ज्यादा से ज्यादा हिंदू धर्म परिवर्तन से बच सके | इसमें संतो को कामयाबी भी मिली| ज्यादातर हिंदू बाहर से आये हुए हमलावरों, जो अब उन पर राज्य कर रहे थे, का कठोर दवाव सह कर भी धर्म परिवर्तन से बच पाए| कर्म कम करके कर्महीनता बढाने का संतो का प्रयास, उस समय, हिंदू समाज को धर्म परिवर्तन से बचाने मैं सफल रहा |

यह हमारी कर्महीनता का मुख्य कारण है |
ज़ाहिर है आजादी के बाद धर्म मैं कोइ बदलाव लाने का प्रयास नहीं करा गया | कर्म का जो भाग गुलामी के समय हटा दिया गया था, संतो द्वारा, उसे वापस धर्म मैं लाने का कोइ प्रयास नहीं करा गया | उलटा भावनात्मक भाग, क्यूँकी समाज को ज्यादा लुभाता है, उसे और बढ़ा दिया गया |

कर्महीनता और बढ़ गयी, और हिंदू समाज को लोकतंत्र मैं रहने के कोइ लाभ नहीं मिल पा रहा है | गरीबी और बढ़ गयी |

इसे बदलना है; उसके बिना मैं निसंकोच कह सकता हूं कि हम लोग गुलामी की तरफ दुबारा बढ़ रहे हैं |

विस्तार मैं जानकारी के लिये निम्लिखित अंग्रेजी की पोस्ट पढ़ें :
A review of RAMCHARITMANAS
Are we doing enough as Hindus

1 comments:

सुनील दत्त said...

सही में ऐसा करने की जरूरत है