Thursday, August 25, 2016

यशोदा के लल्ला कृष्ण पृथ्वी पर माता देवकी और वासुदेव के यहाँ जन्में

यह DUMMY पोस्ट है, क्यूँकी हिन्दू समाज के धर्म के दुकानदारों ने मुख्य पोस्ट "यशोदा के लल्ला
कृष्ण अवतरित हुए माता देवकी और वासुदेव के यहाँ" को फेसबुक पर ब्लाक करवा रखा है!
प्रभु तभी अवतरित होते हैं जब धार्मिक-गुरु समाज को पतन के मार्ग पर ले जाते हैं समाज का पतन इसके बिना संभव नहीं है|
श्री कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा है, और मान्यता है की कंस के कारागार मैं श्री कृष्ण अवतरित हुए| कृष्ण देवकी के आठवे संतान थे, तथा आठवी तिथी(कृष्ण पक्ष) को भादों के महीने मैं अवतरित हुए थे, और नंबर आठ विश्व मैं रहस्य की संख्या के नाम से जाना जाता है
रहस्य को और गहरा करता है श्री कृष्ण का आधी रात मैं अवतरित होना, जब बादल घिरे हुए थे, बारिश हो रही थी|तो जहाँ इतने सारे संकेत हैं कि अवतार का अवतरण रहस्यमय है, तो मेरी और आपकी सामर्थ ही क्या है, उसपर प्रकाश डाल सकें|

थोडा पीछे चलके इतिहास समझ लें; करीब ७००० वर्ष पहले पूरे विश्व मैं बाढ़ आई, और पृथ्वी जलमग्न हो गयी | इस विपदा से उभरने मैं मुख्य समस्या यह आई की कन्याओं की कमी हो गयी, और सफल गर्भ मैं भी संकट आने लगे, तथा सफल गर्भ से सम्बंधित समस्या का समाधान नहीं निकल पा रहा था| समाज विज्ञानिक दृष्टि से विकसित था, इसलिए जेनेटिक इंजीनियरिंग और मानव क्लोनिंग का सहारा लिया गया | देवव्रत या भीष्म पितामह सफलपूर्वक क्लोन करे हुए पहले मानव थे | 

धीरे धीरे प्राकृतिक तरीके से संतान उत्पत्ति दुर्लभ होती चली गयी, और उसकी जगह स्थान ले लिया जैनिटिक इंजीनियरिंग और मानव क्लोनिंग ने, फिर आगे मानव खेती भी आरम्भ हो गयी| मानव अब पहला वाला मानव नहीं रहा, समाज और श्रृष्टि पतन की और बढ़ रही थी| हिन्दू यह मानते हैं की भगवान् स्वर्ग मैं बैठ कर समाज से सम्बंधित कोइ सुधार नहीं ला सकते, अगर उन्हे ऐसा करना होता है, तो वे पृथ्वी पर अवतरित होते हैं, परन्तु, यह हर समय तो संभव नहीं होता| लकिन तब हुआ, और श्री विष्णु, श्री कृष्ण के रूप मैं पृथ्वी पर अवतरित हुए | 

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् !
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे !!

‘जब जब समाज के स्तंभ, जैसे धर्मगुरु, शासक धर्म का मार्ग छोड़ कर , व्यक्तिगत लाभ के लिए अधर्म के मार्ग पर समाज को ले जाते हैं, मैं दिशा सुधार सुनिश्चित करने के लिए अवतरित होता हूँ|’
याद रखीये : 
  • प्रभु तभी अवतरित होते हैं जब धार्मिक-गुरु समाज को पतन के मार्ग पर ले जाते हैं |
  • समाज का पतन इसके बिना संभव नहीं है| 
  • धर्म और धार्मिक नेताओ को सदा प्रमुखता मिली है, पूरे मानव इतिहास मैं ! तो, अच्छे और बुरे काम, यानी कि समाज का हित या अहित, धर्मगुरुओ से ही होता है |
यदी कोइ इसके अतिरिक्त कुछ और बता रहा है तो समझ लीजिये आपके शोषण की तय्यारी है |

बहुत भटकने की आवश्यकता भी नहीं है आज पूरे विश्व में जो ISIS से सम्बंधित जेहादी आंतक हो रहा है वोह भी मुसलमान मजहब के नाम पर ही कर रहे हैं |

महाभारत कोडित है, बिना कोड डाले और समझे, श्री कृष्ण के जन्म, और मानव क्लोनिंग के कारण अंत मैं जो युद्ध हुआ जिसे महाभारत कहते हैं, को समझना आसान नहीं है |

चुकी समस्त पुराण जिसमें रामायण और महाभारत भी शामिल हैं, वैसे ही कोडित हैं, और गणेश-व्यास संवाद यह स्पष्ट करता है कि महाभारत अलग से भी कोडित है, तो महाभारत मैं दो कोड हैं, जो इस प्रकार हैं:

१. व्याख्या और अंतर्वेषण(INTERPRETATION and INTERPOLATION) का प्रयोग करके शिक्षित और सूचना प्राप्त समाज(जैसे की आजका) को, बिना अलोकिक शक्ति के प्राचीन इतिहास बताना, और कम शिक्षित और कम सूचना प्राप्त समाज को(जैसे की ६५ वर्ष पूर्ण, आजादी से पहले का समाज) संस्कृत का अनुवाद करके अलोकिक शक्ति के साथ प्राचीन इतिहास बताना| यह नियम समस्त पुराण जिसमें रामायण, महाभारत भी शामिल है, के लिए है |

२. महाभारत के लिए अतिरिक्त कोड:- धर्म का अनुमान लगा कर उसको महाभारत को समझने के लिए जोड़ना है| आप भी, पूरी महाभारत टीवी पर देखने के बाद, या पढने के बाद, यह नहीं समझ सकते की धर्मयुद्ध किस धर्म के लिए हो रहा था| उसके लिए उपयुक्त यही है की निकट भविष्य मैं जो विश्व स्तर पर(ध्यान रहे, विश्व स्तर पर) समस्या आने वाली है, उसमें जो धर्म है, उसको आप महाभारत से जोड़ दीजिये, आपको पूरी महाभारत समझ मैं आ जायेगी|

बस इस बात का ध्यान रखें, सनातन धर्म चुकी सनातन है, यानी जबसे श्रृष्टि बनी है तबसे है, तो बहुत सरल है | केवल शोषणकरता इसे गूढ़ बताते हैं ताकी ठगाई कर सकें और शोषण कर सके|

अब कृष्ण जन्म; 

कृष्ण माता देवकी और पिता वासुदेव की आठवी संतान थी| देवकी और वासुदेव को दुष्ट कंस ने जेल मैं बंद कर रखा था क्यूँकी उसे डर था की इनकी संतान ही उसके मृत्यु का कारण होगी|राज सिंघासन के लिए कंस ने अपने पिता राजा उग्रसेन को भी जेल मैं डाल रखा था, और फिर राजा बना था |

देवकी की संतान को जन्म होते ही कंस मार देता था| यहाँ पर भी चिकित्सा विज्ञान का प्रयोग करके दो संतान को बचा लिया गया|पहले बलराम, जिसको देवकी की गर्भ से निकाल कर रोहणी के गर्भ मैं स्थान्तरण कर दिया गया, और यह घोषणा होगयी की देवकी का गर्भ गिर गया | श्री कृष्ण के समय, बहुत चालाकी से देवकी का गर्भ यशोदा, जो की नंदग्राम मैं गर्भवती थी, के गर्भ से अदला बदली कर दिया गया|

कृष्ण का एक अत्यंत ही विकसित समाज मैं जन्म हुआ, तथा यादव समाज को उस समय जेनिटिक इंजीनियरिंग और मानव क्लोनिंग के विज्ञानिक ज्ञान के कारण विशेष आर्थिक लाभ भी था| भगवान् के नाते उनका जन्म उद्देश स्पष्ट था, मानव को वापस सामान्य और प्राकृतिक तरीके से संतान की प्राप्ती, परन्तु मानव बहुत आगे, मानव क्लोनिंग मैं निकल चुका था | यहाँ पर यह भी स्पष्ट हो जाना चाहीये कि भगवान् अवतरित हो कर कभी भी अलोकिक शक्ती का प्रयोग नहीं करते हैं |

कृष्ण देवकी के आठवे संतान थे, तथा आठवी तिथी(कृष्ण पक्ष) को भादों के महीने मैं अवतरित हुए थे| भादों को कुछ लोग भाद्रपद या भद्र भी कहते हैं|

और नंबर आठ सदेव पूरे विश्व मैं रहस्य की संख्या के नाम से जाना जाता है| चुकी अभी DIGITAL संसार मैं हिंदी के सर्च इंजन अच्छे नहीं हैं, इसलिए यदी आपको आठ नंबर की रहस्मयता पर कोइ संदेह हो तो Google पर सिर्फ अंग्रेज़ी मैं यह टाइप कर दीजिये “is eight a number of mysteries” और आपको एक दो नहीं अनेक पेज भर के परिणाम मिल जायेंगे |

सिर्फ इतना ही नहीं रहस्य को और गहरा करता है श्री कृष्ण का आधी रात मैं अवतरित होना, जब बादल घिरे हुए थे, बारिश हो रही थी|

तो जहाँ इतने सारे संकेत हैं कि अवतार का अवतरण रहस्यमय है, तो मेरी और आपकी सामर्थ ही क्या है, उसपर प्रकाश डाल सकें| इसके अतिरिक्त सारे ग्रन्थ कोडित भी हैं , तो सारे प्रयास गलत ही परिणाम देंगे |

सही होगा, यदि हम अपना लक्ष मुख्य विषय पर रखे , की श्री कृष्ण ने कैसे और क्या धर्म स्थापित करें |

सत्य तो यह है की अवतार जो धर्म स्थापित करते हैं, उसे दूसरा वेद भी माना गया है | अवतार विभिन्न घटनाओं/समस्याओं से गुजरते हैं, जो की इतिहास बन जाता है, एक साधारण कथा, जिससे समझना आसान है, और जो कर्म या क्रिया करके इन विभिन्न घटनाओं/समस्याओं से अवतार आगे बढ़ते हैं वही मानव के लिए धर्म हो जाता है |तो अनेक धर्म श्री विष्णु अवतरित हो कर पृथ्वी के मानवो को देते हैं , लकिन ताकी शोषण समाज का हो सके, आपको कोइ भी धर्म बताया नहीं जाता, और आप अपनी कर्महीनता के कारण धर्मगुरु से कुछ पूछते नहीं| 

और यह क्रम पिछले ५००० वर्षो से, यानी की महाभारत के कुछ समय बाद ही आरम्भ हो गया | सनातन समाज , यानी की हिन्दू समाज सिकुड़ता जा रहा है |आज भी हमें कोइ भी धर्म रामायण और महाभारत से नहीं पता |

श्री कृष्ण , हिन्दू समाज का शोषण समाप्त करने मैं सहायक बनीये! 
जय श्री कृष्ण !

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ABOUT ME:

A Consulting Engineer, operating from Mumbai, involved in financial and project consultancy; also involved in revival of sick establishments.

ABOUT MY BLOG: One has to accept that Hindus, though, highly religious, are not getting desired result as a society. Female feticide, lack of education for girls, dowry deaths, suicides among farmers, increase in court cases among relatives, corruption, mistrust and discontent, are all physical parameters to measure the effectiveness or success/failure of RELIGION, in a society. And all this, despite the fact, that spending on religion, by Hindus, has increased drastically after the advent of multiple TV channels. There is serious problem of attitude of every individual which need to be corrected. Revival of Hindu religion, perhaps, is the only way forward.

I am writing how problems, faced by Indian people can be sorted out by revival of Hindu Religion.